मंगलवार, 28 जून 2016

गीत सुरीला


Displaying .facebook_1467118427670.jpg












रोज की तरह 
बैठी थी आज भी 
अपनी दफ्तर की कुर्सी पर 
कुछ फाइल देख रही थी 
कि  मीठा -सा  गीत 
कानों  को सुरीला लगा 
धीरे -से पलकें उठी 
होठों पर मुस्कराहट 
घौंसले में फिर -से दिखे  
चिड़िया के बच्चे चार 
गीत सुरीला चूं -चूं का था 
एकबार फिर मन मोहित हुआ 
जिस तरह पिछली साल ॥ 

This is posted under the Indi spire topic `With all your senses "Fall in love- One more time."

4 टिप्‍पणियां:

Pankaj Gosain ने कहा…

very nice.

Amit Agarwal ने कहा…

..bahut sundar!

mere vichar ek khuli kitab ने कहा…

thanks pankaj, Amit ji

Unknown ने कहा…

Loved it mam :-) So nice