शनिवार, 14 नवंबर 2015

Reluctant Embrance

- Is One of my favourite poem, which is worded by my daughter Nancy Bindal .
जब Nancy की यह कविता मैंने  पहली बार पढ़ी तो इसके शब्दों ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया , लगा भूकम्प आ  गया है । अब महसूस करती  हूँ कि  कब हम दिमागी और वास्तविक रूप  से स्वतंत्र होंगे लिंग भेद को लेकर ?

Reluctant Embrace

Nine months were done,but `that hour ' lay,
Swaying between hope and despair 
My "unwanted angel" you ushered out 
Crying lamentations that we  now share.

The womb that bore you so long, 
Wish would have carried a son instead
I'd lived my life as a woman, child
It called upon you , to walk ahead .

No flower offered to the temple Gods,
Not a conch shell blown the day you were born
The mantras were chanted in frenzy 
Your life , your destiny, deliberately torn .

Shackled by chains , given in early marriage
Educate to assist ,not to debate 
Your ideology fainted in mute protests
Alas ! That was to instruct, not educate!

Adorned in bridal finery for the world to know 
You lay here dead, unloved and unmourned
An accidental fire or a dowry death ?
Confined to a statistic in police records .

Your life was brief and best forgotten
A subject of pain and disgrace
My girl I offer you the reasons herein
That justify my reluctant embrace !!

-Nancy Bindal


सोमवार, 9 नवंबर 2015

रोशनी जो हादसा बनी



एक छोटी मगर बड़ी दर्दनाक घटना आप सबके साथ साझा करना चाहूँगी । सुमित झंवर , मेरा  एक student, जिसके  लिए  दिवाली की चकाचौंध कर देने वाली रोशनी सदा के लिए अँधेरा बन गयी ।  उसकी कहानी उसकी जुबानी -

"दीपावली का दिन ,मैं और मेरे दोस्त बड़े ही उत्साहित थे। दीपों की झिलमिलाहट ,पटाकों का शोर ,सुन्दर -सुन्दर परिधान और मिठाइयों की खुशबू ,हमें और भी उत्साहित कर रही थी । विशेषकर बच्चों को पटाकों  का बड़ा शौक  होता है । मैं  भी पटाके छोड़ने के लिए लालायित था । अपने दोस्तों के साथ मैं जैसे ही  पटाकों का आनंद ले रहा था कि  अचानक पटाके की सुलगती चिंगारी मेरी आँखों में घुस गयी । देखते ही देखते मेरी आँख से खून बहने  लगा । मैं और मेरे दोस्त घबरा गए । पीड़ा के साथ -साथ मुझे मेरे माता - पिता का सामना करने में  भी डर लग रहा था । दोस्तों की सहायता से मैं घर लाया गया । मेरे माता - पिता यह हालत देख घबरा गये  । मुझे हॉस्पिटल लाया गया । डॉक्टर ने जाँच के बाद बताया की मेरी आँख के दो टुकड़े हो गए हैं । 

कुछ प्राथमिक इलाज के बाद मुझे चेन्नई के "शंकर नेत्रालय " ले जाया गया । यहाँ  भी डॉक्टर्स ने जाँच के बाद यह फैसला सुनाया की मेरी आँख को बचाया नहीं जा सकता ,तथा शरीर के अन्य भाग में  इसका इन्फेक्शन न  फ़ैले   ,मेरी आँख को पूर्णतया निकालने  का फैसला लिया गया । दूसरे दिन मेरी दाहिनी आँख निकाल दी गयी । मेरी छोटी -सी लापरवाही ने मेरी यह 'रौशनी ' तो मुझ से छीन  ही ली साथ - ही -साथ मेरे माता -पिता, प्रियजनों के चेहरे पर भी उदासी लिख दी । मुझे कृत्रिम आँख का सहारा लेना पड़ा ।" 

इसी सन्दर्भ में मैं अपने Indiblogger के पाठकों से यह कहना चाहूंगी के दीपावली मनाएं ,खूब धूमधाम -से मनाये परन्तु पटाकों  से दूर रहें तथा पूरी सावधानी बरतें । त्योंहार ख़ुशी देने के लिए होते है ,उनका दुर्पयोग जीवन में गम छोड़ जाता है । लापरवाही जीवन में हादसा बन कर आ  सकती है । कहीं  यह जगमगाती चिंगारी आपकी जिंदगी  का हादसा न बन जाये । 

एक  तरफ हम धन के लिए लक्ष्मी की पूजा करते हैं  ताकि हमारा घर धन से सम्पन्न हो ,दूसरी तरफ धन फ़िज़ूल में  व्यर्थ करते है।  इस  व्यर्थ धन से हम कितने भूखों  का पेट भर सकते है । आज बढ़ते  प्रदुषण को और बढ़ावा देते हैं । ये कहाँ  तक तर्कसंगत है । जहाँ  स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए वंहा खाने पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता ।  जिह्वा के स्वाद के सामने  स्वास्थ्य  मात खा जाता है । 

अंत में मैं  यही कहूँगी -  
                              रंग -विरंगे बल्ब झपा -झप  ,महलों में जलते हैं,
                              ट्यूब लाइट के नीचे बाबू लक्ष्मी को छलते है । 
                              महलों में बजती ताली ,झोपड़ियों में ताला है ,
                              महलों में मनती दिवाली , झोपड़ियों में दिवाला है।

आपको तथा आपके समस्त परिवार को दीपावली की ढेरों शुभकामनायें  ।  

               
  

मंगलवार, 3 नवंबर 2015

बेलभ्यू - मेरा सच्चा प्यार

बेलभ्यू -,बेलभ्यू 
हिमालय की गोदी में बसा।,
कंचनजंघा की चोटी  से कसा । 
हरी -भरी धरती की अंगड़ाई ,
तौलती पर्वतों की ऊंचाई । 
बेलभ्यू -,बेलभ्यू---------

रंग -बिरंगे मेघों से घिरा ,
सजाता नन्हे फूलों को सदा । 
विद्या का तू भंडार बड़ा 
विनय का भरता सदा घड़ा । 
बेलभ्यू -,बेलभ्यू---------

तूने दिया जीने का सार ,
चुस्ती -फुर्ती ,कामयाबी दी है अपार । 
तेरे आँचल  में मिलती खुशियां हजार ,
उत्पन्न हुई , कुछ करने की चाहत बार -बार । 
बेलभ्यू -,बेलभ्यू---------

भाषा- जाति , पास -पड़ोसी,
का भेद -भाव कर दूर  । 
तू है मुस्कराने का जरिया ,
देता नन्हे-नन्हे  फूलों का प्यार । 
बेलभ्यू -,बेलभ्यू---------

तेरी क्षत्र -छाया में ना  हो सूनापन ,
झोली भर -भर देता अपनापन  । 
'गुडमॉर्निंग मेम ' से शुरू होता दिन ,
मिलता असीम सुख और सम्मान  । 
बेलभ्यू -,बेलभ्यू---------

रहे सलामत तू बेलभ्यू ,
करूँ न नित गुणगान क्यूँ  । 
फैले तेरा यश , रखूं अरमान यूँ '
ओ ! मेरे प्यारे  बेलभ्यू बोर्डिंग स्कूल । 
बेलभ्यू -,बेलभ्यू---------

 If I talk about my love , the first name comes in my mind is -"Belle Vue Boarding School". My in-laws have started this in the year 1981, since than this has given me love ,respect,fame ,friends and added meaning to my life. In these 35 years I have learnt a lot from my students ,collegues and parents .I really Love YOU- B.V.B.S.

linking with
 Indispire #84
write about your true love, it can be a person, place, thing, activity, anything. Something/someone that makes you feel special, complete in life. #truelove

   

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

mere vichar- ek khuli kitab: सहानुभूति या समानता (emphaty or equality)

mere vichar- ek khuli kitab: सहानुभूति या समानता (emphaty or equality): ईश्वर की सबसे सुन्दर रचना  अद्भुत ,ममतामयी ,स्थिर ललना  पीढ़ी- दर -पीढ़ी , तूने की संरचना  सह पुरुषत्व की तानाशाही ,सीखा लड़ना ।  क्यों आ...

शनिवार, 3 अक्टूबर 2015

सहानुभूति या समानता (emphaty or equality)

ईश्वर की सबसे सुन्दर रचना 
अद्भुत ,ममतामयी ,स्थिर ललना 
पीढ़ी- दर -पीढ़ी , तूने की संरचना 
सह पुरुषत्व की तानाशाही ,सीखा लड़ना । 

क्यों आज चाहिए हमें सहानुभूति 
मानवता की हैसियत से ?
क्या कम हैं हममें  हुनर और अनुभूति 
संतुलन और सहिष्णुता ,किसी नज़र से ?

आजीवन क्या अर्धांगिनी बन 
स्वयं अस्तित्व को क्षीण बनाए ?
क्यों ना एक और एक दो बन 
संसार से यह असमानता हटाएं ?

स्वावलंबी हो पंख फैलाएँ 
अपना रुतबा हर ओर बढ़ाएँ 
बेटी -बेटे का भेद मिटायें 
आत्मसम्मान की ज्योति जलाएँ । 

न होगी जरुरत सहानभूति की 
न होगी जरुरत समानता की 
शक्ति बने दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मीबाई 
इंदिरा ,सरोजिनी ,कल्पना चावला -सी ॥  

गुरुवार, 24 सितंबर 2015

मेरी जिंदगी का मंत्र

मैं सच कहूँ कि  मेरे जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करनेवाला  quote अगर कोई  है तो यह वह quote है  जिसे मेरे  जीवन का मंत्र कहा जा सकता है  -
  "Love what you have.Need what you want,Accept what you recieve.Give what you can. Always remember what goes around,comes around."

Love what you have. Need what you want.--इस भौतिक संसार  में आत्म संतुष्टि बहुत बड़ा गुण  है । जिंदगी तभी आसान ही सकती है ,जब हमारे पास जो कुछ है ,उससे प्यार करें । हमें जिन चीजों की जरुरत है उसकी चाहत जरूर रखें । फिजूल या व्यर्थ की चीजों की चाहत रखने से घर में कूड़ा ही इक्कठा होता है । materialistic चीजों से ज्यादा हम उनसे प्यार करें जो वसूल हमारे जीवन से जुड़े हैं ।

किसी से कोई अपेक्षा रखना शायद जीवन से खुशियां छीन लेती है । जो जैसा है उसे उसी तरह स्वीकार करें ,तो जीवन आसान हो जाता है । अपेक्षा किए  जो कुछ मिलता है वह बेहद ख़ुशी प्रदान करता है । हमारी जिंदगी जिम्मेवारियों से भरी पड़ी हैं, इनका सामना स्वयं हमें करना है ।

'ईश्वर से  हमारा नाता  'दाता  और पता ' का है । वह देता है हम लेते हैं । उसे हम अपने स्वार्थ के सिवाय कुछ नहीं देते । इसलिए कम से कम हमारे पास जो कुछ है -रुपया -पैसा न सही ,प्यार ओर सहानभूति के दो शब्द तो दे ही सकते हैं ।


Accept what you recieve--इस परिवर्तनशील संसार में समय के अनुसार परिवर्तन को स्वीकारना बहुत जरुरी है । आज generation gap की सबसे बड़ी वजह "परिवर्तन ' को अस्वीकरना है । सहनशीलता और समझदारी दोनों के बिना संयुक्त परिवार चलाना  नामुमकिन है । रिश्तों को निभाना ,दोस्ती बरकरार रखना युवावों के साथ चलना -इन सब के लिए सोच बदलनी होगी ।

Always remember,what goes around ,comes around- हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए की हम औरों के साथ जैसा सलूक  करते हैं ,हमारे साथ भी वैसा ही होता है । यह स्वाभाविक है 'जैसा करेंगें वैसा भरेंगें "। शकुन के बदले शकुन ,अपशब्द के बदले अपशब्द ही मिलते है । Accept the responsibility of your life .it is you who will get you where you want to go, no one else.

मैं विश्वास करती हूँ -'life does not get better by chance ,it gets better by change.' परिस्थिति  व जरुरत के अनुकूल स्वयं को बदलने में । खुद वो बदलाव बनिए जो आप दूसरों में देखना चाहते हैं. । 

यह article मैंने सिर्फ  Indispire #lifemantra  के लिए लिखा है ।    

मंगलवार, 15 सितंबर 2015

अपूर्ण ख्वाहिशें

<b>Poetry</b> is the art of creating <b>imaginary</b> gardens with real toads.
picture google
क्या सोचती थी ,
वह याद नहीं ।
क्या चाहती थी ,
भूल गयी ।
समय के थपेड़ों ने ,
समुद्री लहरों -सी ,
एक छोर से
दूसरे छोर  तक ,
यूँ सुरक्षित ,
पहुंचा दिया कि -
शहर की गलियां ,
खोजने स्वयं
निकल पड़ी ।
जीवन के पथ पर ,
अनेक रूप मिले ,
पर किसी से कोई
शिकवा नहीं,
क्यूंकि हमसफ़र 
कुछ ऐसे मिले 
फिर चाह कोई 
बाकी  न रही । 
जीवन की संध्या 
के आते -आते ,
अपूर्ण ख्वाहिशें 
कविताओं में 
परिणित हो गयी । 
ऐ खुदा ! अब 
इन कविताओं को 
जिन्दा रखना मुझमें ,
कि  हँसते -मुस्कराते 
गुजरे जिंदगी ।