रामराज्य की कल्पना हर व्यक्ति करता है । हम सभी एक ऐसी व्यवस्था चाहते हैं ,जहाँ सकुन की जिन्दगी बसर कर सकें । यंहा प्रश्न यह उठता है की क्या इस जमीन को नरक बनाने के लिए हम स्वयं जिम्मेवार नहीं हैं ? क्या हमने अपनी आचार संहिता का पालन किया ? क्या हम अपने दैनिक जीवन में ऐसी गलतियाँ नहीं करते ,जिनसे हमें शर्मसार होना पड़े ? क्या हम अपने पर्यावरण को दूषित नहीं करते ? ऐसे बहुत सारे प्रश्न है जिनका जवाब हमें स्वयं से पूछना चाहिए । सुशासन की कल्पना करना अच्छी बात है ,परन्तु उसे कार्यान्वित करना भी हमारा फर्ज बनता है। अपने रोजमर्रा की जिन्दगी में इन छोटी -छोटी कल्पनाओं पर अमल करें ,तो निश्चय ही हम रामराज्य की कल्पनाओं से रूबरू हो सकते हैं ।
रामराज्य
रामराज्य ,रामराज्य ,रामराज्य ,हो सारा जहाँ ,
स्वच्छ ,सुन्दर ,स्वस्थ भारत देश महान ।
ईश्वर ने दिया प्रकृति का दान ,
सस्कृति धर्म की लगी कतार ।
ऋषि -मुनियों की भूमि महान ,
भाषा जाति का भरा भण्डार ।
वरदान स्वरुप मिली विजय । रामराज्य-------
ना ही वृक्छ कटे ,न ही हमारी धरती धंसे ,
न हो बेघर प्रियजन हमारे ,बेमौत मरें न सखा सहारे ।
सुन्दर हरित धरती की अंगड़ाई ,लाए न जीवन में महंगाई ,
पॉली बैग का करे तिरस्कार ,धरती का हो नव श्रृंगार ।
प्रदूषण रहित हो हमारा राज्य । रामराज्य -----------
दहेज़ की चिता में न जले ,बहन बेटी किसी की ,
ड्रग के ग्रास में जकड़े न संतान किसी की ,
धर्म की आड़ में न हो छति ,देश की ,
जाति -पांति की होड़ में कलंकित हो न धरती हमारी,
हो सम्मान नारी का ,अधर्म की पराजय । रामराज्य ---------
न हो कुर्सी की लड़ाई ,न पनपे आतंकवाद ,
नेताओं के स्वार्थ में न हो देश निलाम ,
शहीदों के बलिदान को करें सलाम ,
देशप्रेम और शिक्छा का करें सम्मान ,
करें यही कामना मिले हर पथ विजय । रामराज्य --------
जश्न आजादी का बार-बार मनाएं,
स्वतंत्रता को सलामत रखना सिखाएं ,
हो होंसले बुलंद ,देश का गौरव हमारी सौगंध ,
अहिंसा अमन का हर पल पाठ पढ़ाए ,
शांति सन्देश हो सुरमय । रामराज्य ----------